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आज का युवा अनेक चुनौतियों के बीच अपना भविष्य गढ़ने की कोशिश कर रहा है। बेहतर शिक्षा, प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं, नौकरी की अनिश्चितता, करियर बनाने का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं उसके मानसिक तनाव को बढ़ा रही हैं। ऐसे में कुछ युवा तनाव से राहत पाने के लिए गलत रास्ता चुन लेते हैं। शुरुआत अक्सर "थोड़ी सी राहत" या "दोस्तों के साथ मौज-मस्ती" के नाम पर होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत एक गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। चिंता की बात यह भी है कि समाज के कुछ वर्गों में महंगी शराब और महंगी सिगरेट को एक प्रकार का स्टेटस सिंबल मानने की प्रवृत्ति बढ़ी है। कई बार युवाओं को यह भ्रम हो जाता है कि ऐसे उत्पादों का सेवन उन्हें आधुनिक, सफल या प्रभावशाली दिखाएगा। जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। किसी व्यक्ति की पहचान उसके व्यक्तित्व, ज्ञान, व्यवहार और उपलब्धियों से बनती है, न कि उसके हाथ में पकड़े गए शराब के गिलास या सिगरेट से। इसी प्रकार आजकल फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ एक नया खतरा भी सामने आया है। कम समय में आकर्षक और सुगठित शरीर पाने की चाहत में कुछ युवा बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड और अन्य हानिकारक पदार्थों का सेवन करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले कृत्रिम आदर्शों और त्वरित परिणामों की लालसा ने इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है। लेकिन विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि ऐसे पदार्थ शरीर के हार्मोनल संतुलन, हृदय, यकृत और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकते हैं। वास्तव में स्वस्थ शरीर का निर्माण किसी शॉर्टकट से नहीं होता। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और अनुशासित जीवनशैली ही स्थायी फिटनेस का आधार हैं। जिस प्रकार सफलता का कोई त्वरित विकल्प नहीं होता, उसी प्रकार अच्छे स्वास्थ्य का भी कोई शॉर्टकट नहीं होता। समाज को भी अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। हमें उन युवाओं को आदर्श बनाना चाहिए जो अपने ज्ञान, मेहनत, खेल प्रतिभा, सामाजिक योगदान और अच्छे चरित्र से पहचान बनाते हैं, न कि उन लोगों को जो नशे या दिखावे की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। परिवारों को बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना होगा, ताकि वे तनाव, असफलता और चुनौतियों का सामना स्वस्थ तरीके से करना सीख सकें। भारतीय संस्कृति सदैव संयम, आत्मनियंत्रण और संतुलित जीवन का संदेश देती रही है। योग, ध्यान, खेलकूद, संगीत, साहित्य और सामाजिक गतिविधियां युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के प्रभावी माध्यम हो सकते हैं। यदि हम अपने युवाओं को सही मार्गदर्शन और स्वस्थ वातावरण प्रदान करें, तो वे न केवल नशे से दूर रहेंगे, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम नशे को केवल एक कानूनी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक और मानसिक चुनौती के रूप में समझेंगे। साथ ही यह संदेश भी फैलाएंगे कि सफलता का प्रतीक नशा नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और सकारात्मक व्यक्तित्व है। युवाओं को यह समझना होगा कि महंगी शराब, महंगी सिगरेट या खतरनाक स्टेरॉयड नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, आत्मविश्वास और अनुशासन ही जीवन के वास्तविक स्टेटस सिंबल हैं। सादर वंदे
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